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मई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कारागार रक्षक

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समाज के आपराधिक कचरे को खिला पिलाकर, संड-भूसंड बनाकर और पाल पोसकर सुरक्षित रखे जाने वाले लिबरल एवं सामूहिक स्थान को जेल कहा जाता है। समाज के इसी आपराधिक कचरे को सकुशल संभाले रखने का जिम्मा सरकार का होता है। सरकार जेलों के कुशल प्रशासन हेतु अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तैनात करती है। प्रशासनिक अनुक्रम में सबसे निचले पायदान पर ऐसा जीव जो, इंसान और जानवर के बीच कि अदृश्य कड़ी होते हुए भी अपने इस विशेष गुण पर थोड़ा भी जो गर्व न करे, परिवार और समाज से अंशतः आइसोलेट एवं अधिकांशतः बहिष्कृत रहते हुए अपने जेल के घिसेपिटे कर्तव्य के प्रति थोड़ा जागरूक और थोड़े सुस्त, इस जीव को "जेल प्रहरी" कहा जाता है। यह उल्लू और कुत्ते का वंशज न होते हुए भी हरकते एवं व्यवहार उन्ही के जैसी करने वाला विलक्षण प्राणी है। जेल मैनुअल का डर और पूर्व अंग्रेजी शासन कि फितरत ने इस विलक्षण जीव कि अद्भुत पर्सनालिटी डेवलप की है।         धकापेल कॉम्पीटीशन का पहाड़ जो चढ़ चूका, अपने दुर्भाग्य से लड़ चुका, थका हारा, बेरोजगारी और जरूरतों का मारा, समाज के दबाव में दबा, अभ्यर्थी बेचारा लाचार होकर ...

रिश्तों को सहेजें

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हमारे मानवीय समाज में जुड़ाव का सबसे महत्वपूर्ण और मूलभूत तत्व क्या है? यकीनन हमारे अपने अपनों से रिश्ते ही है। अगर रिश्ते न हो तो समाज महज मकानों का जंगल मात्र ही हो सकता है। लेकिन सुसंगठित समाज बिल्कुल नहीं। समाज कि बुनियाद में रिश्ते ना हो ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है। भारतीय समाज तो वैसे भी कई रिश्ते नातों के ताने बाने में गूंथा हुआ है। यहां पारिवारिक श्रेणीक्रम के साथ-साथ सामाजिक धार्मिक श्रेणीक्रम भी समाज में व्यापक स्तर पर देखने को मिलते है। आज भी इस भयंकर  आधुनिकता के बावजूद समाज में रिश्तों का प्रभाव स्वयं को जीवित रख रहा है, यह वाकई बहुत अच्छा लगता है। किसी भी समाज या राष्ट्र की स्वस्थ परंपराएं, उस समाज या राष्ट्र के एकजुट बने रहने में ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह भी एक प्रकार का विकासशील रूढ़िवाद है।               किसी भी व्यक्ति को सुख और दुख दोनो ही परिस्थितियों में अपने-अपनो की जरूरत पड़ती है। अगर आप बहुत ज्यादा खुश हो तो आप खुशी किनसे जाहिर करोगे? अगर आप बहुत दुखी हो या दुख के पर्याप्त कारण भी हो तो वैसी स्थिति में भी किसके ...