आओ जंजीरे तोड़े


सारी हसरतों को दफन करके
बैठे हैं हाथों को हाथों में बांधे
अगर नींद कहीं से टूटे कभी
सपनों को हकीकतो से जोड़ें
आओ जंजीरे तोड़े............

कब तक यूं हीं सब्र को साधे
कब तक संतापी सांसे थामें
कब तक बेड़ियां पैरों में बांधे
कब तक हुंकार से मुंह मोड़ें
आओ जंजीरे तोड़ें...........

तन आजाद, वतन आजाद
मन क्यों रहे गुलामी में मैला
क्यों लादे परवशता का थैला
अपना कोई स्वाभिमान न छोड़े
आओ जंजीरें तोड़े.............

एकजुट न थे बिखर पड़े
तुच्छ बातों में झगड़ पड़े
अपनी ही जिद पर रहे अड़े
राह में आए चाहे जितने भी रोड़े 
आओ जंजीरे तोड़े.........

           जय भारत!

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