कारागार रक्षक
समाज के आपराधिक कचरे को खिला पिलाकर, संड-भूसंड बनाकर और पाल पोसकर सुरक्षित रखे जाने वाले लिबरल एवं सामूहिक स्थान को जेल कहा जाता है। समाज के इसी आपराधिक कचरे को सकुशल संभाले रखने का जिम्मा सरकार का होता है। सरकार जेलों के कुशल प्रशासन हेतु अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तैनात करती है। प्रशासनिक अनुक्रम में सबसे निचले पायदान पर ऐसा जीव जो, इंसान और जानवर के बीच कि अदृश्य कड़ी होते हुए भी अपने इस विशेष गुण पर थोड़ा भी जो गर्व न करे, परिवार और समाज से अंशतः आइसोलेट एवं अधिकांशतः बहिष्कृत रहते हुए अपने जेल के घिसेपिटे कर्तव्य के प्रति थोड़ा जागरूक और थोड़े सुस्त, इस जीव को "जेल प्रहरी" कहा जाता है। यह उल्लू और कुत्ते का वंशज न होते हुए भी हरकते एवं व्यवहार उन्ही के जैसी करने वाला विलक्षण प्राणी है। जेल मैनुअल का डर और पूर्व अंग्रेजी शासन कि फितरत ने इस विलक्षण जीव कि अद्भुत पर्सनालिटी डेवलप की है। धकापेल कॉम्पीटीशन का पहाड़ जो चढ़ चूका, अपने दुर्भाग्य से लड़ चुका, थका हारा, बेरोजगारी और जरूरतों का मारा, समाज के दबाव में दबा, अभ्यर्थी बेचारा लाचार होकर ...